इक लघु कथा। अब आप जरा शर्मा जी का कसूर बताएगे,कि वो बेचारे किस वजह श्रीमति जी द्वारा पीटे गए, जबकि वो तो उन्ही की आज्ञापालन कर रहे थे। दरअसल हुआ यूं कि पत्नी जी ने सुबह दस बजे cooker मे दाल चढाई ओर हिदायत दी कि वो बाजार जा रही है तो सीटी व दाल का ध्यान रखना तीन बज जाए तो गैस बंद कर देना।यह कह पत्नि जी तो निकल पडा पर इधर बेचारे शर्मा जी।इंतजार मे ओर गजब देखे ,कि तीन बजे तो दूर बारह बजे से पहले ही कूकर ने सीटी देना तक बंद कर दिया सो शर्मा जी ने भी गैस बंद कर दी। जबकि सीटियां तो मात्र 159 ही बजी थी।उसके बाद तो टैं भी न बोली।तो उन्होने थक हारकर तीन से बहुत पहले ही गैस बंद कर दी पर जब पत्नी जी लौटी किचन मे गई, और आकर बेचारे शर्मा जी को पीटा ,जो पीटा कि ,कि उन्हे पूछने लायक भी न छोडा कि गलती कहा हुई। न,न, भई, मुझसे भी मत पूछना । मै भी शर्मा ही हूं। हिम्मत है तो या तो अपनी खोपड़ी, घुमाओ अन्यथा, पत्नि जी से पूछो ।अरे ,भई कहा चले ...
जय श्रीकृष्ण। सभी मित्रगण सुधिजन ,पाठकगण, व,आदरणीय जन को राधे राधे के स्नेहिल अभिनंदन के बाद मीठी सी जय श्रीकृष्ण। साथियो अक्सर कहते सुना है भज ले हरि का नाम तू बंदे फिर पाछे पछताएगा। या गुरू धारण कर लिया तो आवश्यक है सुमिरन। सुमिरन है क्या ? क्यू आवश्यक है लाभ हानि सब की चर्चा करेगे यहा। तो आइए पहले जाने कि :- *सुमिरन है क्या ? सुमिरन अर्थात सिमरन। यानि पुनः पुनः किसी मंत्र या नाम का दोहराव या उच्चारण करना।। पुनः पुनः ,बार बार। आखिर बार बार क्यू? तो कारण स्पष्ट है मन की गति तीव्र है ,चलायमान है,चंचल है मन,अस्थिर है वायु की भांति टिकता नही शायद वायु के गुण लिए है सो इस अस्थिर व चंचल मन को स्थिरता देने के लिए अभ्यास की आवश्यकता है यह अभ्यास सिमरन कर पूरा किया जा सकता है।एक कारण यह है । दूसरे और भी कई महत्वपूर्ण कारण है।मसलन अपना उद्धार। हम अपने मन को न...
पंच_तत्व_और_शरीर.... Collection:- जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारा शरीर पंच तत्वों से बना है। ये पंच तत्व ही भौतिक और अभौतिक रूप में शरीर का निर्माण करते है। ये पंच तत्व क्या है और शरीर में कैसे काम करते है। आज इन्ही तत्वों को समझेंगे। ये पंच तत्व है क्रम अनुसार...... 1. पृथ्वी, 2. जल, 3. अग्नि, 4. वायु, 5. आकाश। #1_पृथ्वी_तत्व------ ये वो तत्व है जिससे हमारा भौतिक शरीर बनता है। जिन तत्त्वों, धातुओं और अधातुओं से पृथ्वी (धरती) बनी है, उन्ही से हमारे भौतिक शरीर की भी सरंचना हुई है। यही कारण है कि हमारे शरीर में, लौह धातु खून में, कैल्शियम हड्डियों में, कार्बन फाइबर रूप में, नाइट्रोजन प्रोटीनरि रूप में और भी कितने ही तत्व है जो शरीर में पाए जाते है। और यही कारण है कि आयुर्वेद में शरीर को निरोग और बलशाली बनाने के लिए धातु की भस्मों का प्रयोग किया जाता है। #2_जल_तत्व-------- जल तत्व से मतलब है तरलता से। जितने भी तरल तत्व जो शरीर में बह रहे है वो सब जल तत्व ही है। चाहे वो पानी हो, खून हो, वसा...
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