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भूल।

  तूझे चाहना ,क्या सच मे , कोई  बडी भूल थी, जो हो भी गई, तो, तुम्हे भी तो  वो कबूल थी, फिर  क्यू जिद्द  ने तुम्हारी, इक रिश्ते को दफन किया। इतनी क्या मजबूरी थी, जो बरकत को हज्म किया तुमने दिला कर , हर पल ,रूखे एहसास, छीने वो सारे पल जो , मेरे  थे खास। वो सब तो न  कभी,   लौट कर अब  आएगे। वो तो हो गए  धूल, अब कहा पोंछे जाएगे। यह सितम तुम्हारे मुझे , नही है बिल्कुल   भी कबूल हाँ, माना ,वो मेरा, चाहना तुमे , भूल थी ,बहुत  बडी भूल ।              ##### संदीप शर्मा। ( देहरादून से।) Sandeepddn71@gmail.com Sanatansadvichaar.blogspot.com , Jai shree Krishna g ..

पुनर्जन्म पर मेरा मत।

  जय श्रीकृष्ण। मित्रगण। आप और हम पर कृष्ण  कृपा बरसती रहे।दोस्तो पुनर्जन्म  की धारणा पर विभिन्न  लोग विभिन्न  मत रखते आए है।हमारी सनातन परंपरा  व धर्म  के अनुसार  पुनर्जन्म  की आस्था हमारे विद्वान जन व वैज्ञानिक व वैदिक  ग्रंथ  के ज्ञाता बडे सशक्त  रूप से रखते आए है व इसका   अनुमोदन   भी करते आए  है।और मै भी इसे मानता हू कि पुनर्जन्म  होता है। जैसे गीता मे श्रीकृष्ण  कहते है तेरे और मेरे कई जन्म  हो चुके है तू उन्हे नही जानता पर मै जानता हू।और भी हम शास्त्र मे भी यह कहते  सुनते आए है कि फलाने अवतार मे फलाना फला था व फलाने अवतार मे फलाना फला।तो दोस्तो यह तो निश्चित  प्रमाण सा  प्रस्तुत  नही करते ,कुछ निश्चित  आभास  सा तो कराते है पर लोग कहते है क्या पता ?तो यह प्रश्न  क्या पता ? असमंजस  का कारण  बनता है ।पर कुछ  बाते है जिन्हे देख कर  ऐसा अनुमान  लगाया जा सकता है। जैसे देखे तो प्रकृति  की समस्त  चीजे या वस्तुए  व...

अमरूद का पेड़।

  सहज होता है पेड़ अमरूद का, उग आता है ,बेटी के वजूद सा, फल भी तो बेटी से मधुर है, मीठे,रसीले,स्वाद बहुत है। अमरूद  का पेड़,याद है बचपन की, जब  तोडे थे फल ,बात है कल की, कई बार तो झगड़े, मौल ले लिए, पेड़ अमरूद  के ,अपने हो लिए, याद आती है ,वो सारी यादे, नमक लगा अमरूद  थे खाते, कितनी बेफिक्री कि थे वो बाते, हक समझते थे ,सब डांट  भी खाके। पेड अमरूद  का बाप सा होता, बच्चे का प्यार है  प्रेमवश ढोता, दे देता फल खाकर सोटा, बदला लेने को कभी भी न सोचा। पेड अमरूद  का  हाकीम सा भी  है, रखता ध्यान  स्वस्थ  का भी है, कई  रोग मिटा देता है, पत्ते  फल का भी गुण  होता है, रोगनाशक  कई जो गुण  है , बचा लेते ये कर शगुन है। पेड अमरूद का,बच्चे जैसा, जहा चाहे उगा लो ,लग जाता वैसा, मित्र सा बनकर इत्र हो जाता, हर  किसी को इसका फल भाता। पेड  अमरूद  का इक दर्शन है, खाने को जो इसकी तडपन है, ठेली पे वो आकर्षित  न करती, जो लगे पेड पर बढाती धड़कन है। है न ये पेड ये यार हमारा , ...

कया आप मुझे जानते है?

  एक सज्जन  थे शायद कही, किसी अवरोध  मे, कुंठित  थे व भरे थे मन के भीतर के, क्रोध  से, झुंझलाए वो कईयों पर , पर और तो कुछ  कह न पाते, कैसे फिर वो इस स्थिति से कहते सबको कुछ  दिखाते, बस धमका रहे थे कह कर इतना क्या आप  मुझे नही जानते ? बात बढ गई  थी स्वर सुन उस अनजान  के, हानि हो सकती थी भारी इन प्रश्न के बोध से, बचना होगा ऐसे सब को भीतर के क्रोध  से। एक और परिदृश्य  क्यू न प्रस्तुत  करू, क्या आप जानते है मुझे , इसके रूबरू करू। अब के, ये प्रश्न  था ,कही किसी अनजान  से, जो बढाना चाहता था,जान व पहचान  वह, यहा जब उनके परिचय हुए, बात कुछ  आगे बढी, बदले तब फोन नंबर ,जुडी रिश्तो की नई  ही कढी, ये  भी तो न शब्द  थे वही, फिर फर्क  था क्या इसका हुआ, यहा पहले पिटने को थे इधर संबंध, जुडने का हुआ। असल की जो गहरी सरल,छोटी सी है बात है, भाव कैसे आपके ,वो शब्द बताते,साहब है, एक जहा  मरहम बनते,वही दूसरे वो घाव है। क्या आप  मुझे जानते है? यह परिचय बता रहा है ये , जैसे ह...

पुनर्जन्म की आस्था

  जय श्रीकृष्ण। मित्रगण। आप और हम पर कृष्ण  कृपा बरसती रहे।दोस्तो पुनर्जन्म  की धारणा पर विभिन्न  लोग विभिन्न  मत रखते है।हमारी सनातन परंपरा  व धर्म  के अनुसार  पुनर्जन्म  की आस्था हमारे वैज्ञानिक व वैदिक  ग्रंथ बडे सशक्त  रूप से इसका अनुमोदन  करती है।और मै भी इसे मानता हू कि पुनर्जन्म  होता है।जैसे गीता मे श्रीकृष्ण  कहते है तेरे और मेरे कई जन्म  हो चुके है तू उन्हे नही जानता पर मै जानता हू।और भी हम कहते है फलाने अवतार मे फलाना फला था व फलाने अवतार मे फलाना फला।तो दोस्तो यह तो निश्चित  प्रमाण। प्रस्तुत  नही करते पर कुछ  बाते है जिन्हे देख कर  ऐसा अनुमान  लगाया जा सकता है।जैसे देखे तो प्रकृति  की समस्त  चीजे या वस्तुए  वस्तुतः  चक्रीय है।यानि रूप भले ही बदल ले पर मूलतः वो वही है कही कही तो वो स्वभाव  भी बदल लेती है।पर रहती वो वही है।जैसे खेत मे उगने वाली फसल,को ले जल को ले या वायु को ले अथवा कोई  अन्य प्राकृतिक  उदाहरण  ले।चलिए  यहा हम वायु व ज...

झूठी।

  वो झूठ का सामान  बांध, सच दिखाना चाहती है, जाने जिंदगी को,खाक मे खुद ही ,मिलाना क्यू चाहती है। फितरत मे बस बनावट ही , बनावटी ही रिश्ते का, जाने मंजर ये झूठ के , किसको दिखाना चाहती है, सुर्खी बिंदी  लाली,बिछुए, पहने कभी घर पर नही, बाहर जा पहन कर इनको, किसको रिझाना चाहती है। जिदगी मेरे संग उसे रास आई ही नही, वो शायद यह मुराद , किसी आस  बिताना चाहती है। अदालत,सावधान  इंडिया के डरावने मंजर, जाने कयो वो वहम, मेरी जिन्दगी मे मिलाना चाहती है, दो घडी ,बैठी नही ,कभी वो ,पास मेरे चैन से, वो जिंदगी  फेसबुक  पे ताउम्र  बिताना चाहती है। आज तक इस घर  को उसने अपनाया ही नही, शायद वो पहले छोडे घर को लौट जाना चाहती है। गठ जोड हुआ शायद कुछ  खास ही मजबूरी होगी, गठ जोड तोड वो साथ मेरा छोड  जाना चाहती है, बेटे को  करके वो परे सास को बुरा ही कहे, यह कौन सी नई  रिवायत  वो आप चलाना चाहती है, सब सह रहे है मंजर, बेरूखी ,बेखुदी,के सब , तब भी  वो खुद ही   दुखी है , यह जताना चाहती है। सब कुछ  करके...

दिल ने कुछ यू कहा।

 तुमने कह कर वो भ्रम भी तोड दिया, प्यार मे हो किसी के, यूं फिर मैने भी  छोड दिया।                  #### नंगे पाॅव तुम्हारा चले आना, वो मुस्करा कर यूं ही  चले जाना। बता गया अदाओ के हकीम हो। सौदे कर लेते हो अच्छे, काफी  मिजाज के शौकीन हो।                ####### सब गुलाब  दे रहे थे,उनको  हमने साथ देने का वादा तक  किया , वक्त वक्त की बात है , बडा ही खुद  पर तब गुमाँ था उनको, वो गुलाब  अब मुर्झा गए है, हमे कहा भी  याद  है सब वो। जिन्हे देख अब वो शरमा  रहे है।           ####### कतरा कतरा ऑसू  मैने, जोडे तेरे,सह गम मेरे देख समंदर भर आया मै,, कितने थे जो गहरे  सेहरे। तूने उनकी कदर न जानी, उस पानी का मोल न जाना, उनको बस नमकीन ही माना, दुनियाभर को मिला यही से , भर भर झोली,भरा खजाना।                  ##### महसूस  तो हजूर  तब कीजिए,  मसरूफ  न किसी को जब कीजि...